2047 तक विकसित भारत के निर्माण में हर नागरिक की है अहम भूमिका: वेंकैया नायडू

2047 तक विकसित भारत के निर्माण में हर नागरिक की है अहम भूमिका:  वेंकैया नायडू

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर, 2026: 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में भारत की यात्रा के लिए सुशासन और आर्थिक प्रगति की तरह ही नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। ‘भारत की सोच’ की प्रमुख चर्चा-श्रृंखला (डिस्कशन सीरीज) ‘मंत्रणा’ में अपने मुख्य संबोधन में भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने जोर देकर कहा कि राष्ट्र-निर्माण की जिम्मेदारी केवल सरकार पर नहीं छोड़ी जा सकती।

नायडू ने कहा, “नीतियों से दिशा तय होती है, लेकिन प्रयासों की सफलता एवं तेजी इस बात पर निर्भर करती है कि नागरिक अपना कर्तव्य किस तरह निभाते हैं।” उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी प्रभावी शासन, बुनियादी ढांचा और विकास के लिए अवसर उपलब्ध कराना है। वहीं नागरिकों की जिम्मेदारी है संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना और अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करना।

विकसित भारत की व्यापक आकांक्षाओं पर बात करते हुए नायडू ने कहा, “2047 तक हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भूख, अत्याचार, भेदभाव या असमानता का अस्तित्व न रहे। वास्तविक प्रगति की झलक सिर्फ आर्थिक आंकड़ों से नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण, समानता एवं एकता से भी नजर आती है।”

राष्ट्र-निर्माण के आधार स्तंभों पर विस्तार से बात करते हुए श्री नायडू ने कहा कि हर व्यक्ति द्वारा अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना ही सच्ची देशभक्ति है। उन्होंने देश के युवाओं से बड़े सपने देखने, मेहनत करने और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित राष्ट्र बनने की भारत की यात्रा में यहां का डेमोग्राफिक डिविडेंड (जनसांख्यिकीय लाभांश) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहित किया कि वे विदेश में रहते हुए वैश्विक कौशल और अनुभव हासिल करें और देश की प्रगति में योगदान देने के लिए उस विशेषज्ञता को भारत में लाएं। उन्होंने क्षेत्र, भाषा, जाति और समुदाय के भेद से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता को आवश्यक बताया और जोर दिया कि सभी मतभेदों से ऊपर उठते हुए राष्ट्र को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है।

अपने स्वागत संबोधन में ‘भारत की सोच’ के चेयरमैन अनिल राजपूत ने कहा कि नागरिक जिम्मेदारी और व्यक्तिगत जवाबदेही की मजबूत भावना के साथ विकसित भारत के लक्ष्य का समर्थन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम अक्सर विकसित भारत का मतलब बुनियादी ढांचे, फलते-फूलते कारोबार, उन्नत तकनीकों और आधुनिक शहरों को मानते हैं। इस बात में संदेह नहीं है कि ये सब आवश्यक हैं, लेकिन इस प्रगति का लाभ हमें किस तरह मिलेगा, यह हमारे हर दिन के फैसले से तय होता है। सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करना, पर्यावरण की रक्षा करना, नियमों का पालन करना और ईमानदारी से काम करना केवल व्यक्तिगत कार्य नहीं हैं; ये उस समाज को आकार देते हैं जिसका निर्माण हम सब मिलकर करते हैं। जब हम कहते हैं ‘यह मेरा देश है,’ तो हमें यह कहने के लिए भी तैयार रहना चाहिए कि ‘यह मेरी जिम्मेदारी है।’ विकसित भारत की यात्रा तब आगे बढ़ेगी जब नागरिक होने की जिम्मेदारी निभाना हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाएगी।”

इस दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति ने जन चेतना 2026 वाद-विवाद और निबंध प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया। इन प्रतियोगिताओं का आयोजन ‘भारत की सोच’ ने ‘मानव रचना सेंटर फॉर पीस एंड सस्टेनेबिलिटी’ के साथ मिलकर किया था। इनके माध्यम से नागरिकों की जिम्मेदारी, नागरिकता और राष्ट्र-निर्माण से जुड़े विचारों में स्कूली विद्यार्थियों की सहभागिता को सम्मानित किया गया।

अपने समापन वक्तव्य में ‘भारत की सोच’ के डायरेक्टर आर.के. पचनंदा, आईपीएस (सेवानिवृत्त) ने राष्ट्र-निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की यात्रा केवल सरकारी प्रयास या आर्थिक महत्वाकांक्षा का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह एक गहरा नैतिक एवं नागरिक दायित्व भी है। उन्होंने रेखांकित किया कि विकसित भारत का सपना एक सामूहिक प्रयास है। हम में से प्रत्येक को सोच-समझकर किए गए अपने कार्यों और नागरिक कर्तव्यों के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ इस सपने को कदम-दर-कदम साकार करना होगा।

उन्होंने कहा कि पीढ़ियों को जोड़ने की जिम्मेदारी की देश के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका है। इस पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “हमारा अतीत हमें ज्ञान देता है, हमारा वर्तमान हमें अवसर देता है और हमारा भविष्य हमें जिम्मेदारी देता है।”

‘मंत्रणा’ के माध्यम से ‘भारत की सोच’ भारत के भविष्य को आकार देने वाले विचारों पर संवाद को आगे बढ़ा रहा है। यह विभिन्न दृष्टिकोण को एक साथ लाकर इस विषय पर चर्चा करता है कि देश के सभ्यतागत ज्ञान को कैसे समकालीन चुनौतियों से जोड़ा जा सकता है और इससे किस तरह से विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने में योगदान मिल सकता है।